राघव कैमरे को अपनी गोद में रखे बैठा था। उसकी उंगलियाँ लेंस को एडजस्ट कर रही थीं। पास ही बैठी थी आलीशा — नीले रंग के नेट के सूट में, जो शरीर को पूरी तरह छिपाता तो था, मगर हर मोड़, हर कर्व को छुपा नहीं पाता था। "आपको फोटोग्राफी में क्या सबसे ज़्यादा पसंद है?" राघव ने पूछा। "देखना..." आलीशा ने धीमी मुस्कान के साथ कहा। "बस एक नज़र में समझ जाना कि कौन-सा फ्रेम किसे पकड़ रहा है... और कौन-सा फ्रेम मुझे..." राघव ने कैमरे को उठाया और बिना बोले उसकी तरफ इशारा किया — "बैठिए वैसे... हाँ... थोड़़ा एक कंधा नीचे करें। एक पैर मोड़ लीजिए।" आलीशा ने थोड़ी हिचक के साथ वही किया। "इस सूट में आप जितना छुपना चाहती हैं, उतना ही ज़्यादा दिखाई दे रही हैं," राघव ने कैमरे से झाँकते हुए कहा। "मतलब?" "मतलब… ये नीला जाल जितना ढँकता है, उससे ज़्यादा उभारता है। जैसे कोई कह रहा हो — देखो, मगर पूरा मत देखो।" क्लिक। फिर एक और क्लिक। राघव ने कैमरे का प्रीव्यू मोड खोला और उसकी तरफ झुककर स्क्रीन दिखाई। "ये देखिए। ये आपके कंधे के नीचे की हल्की सी परछ...